फूड एक्सपो एंड कॉन्क्लेव 2026 को लेकर खाद्य प्रसंस्करण बैठक

1. खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये चैम्बर ने की सरकार से मांग।  
2. खाद्य प्रसंस्करण योजना में उप्र खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की दी विस्तृत जानकारी – प्रधानाचार्य, लोकेश कुमार।
3.. खाद्य प्रसस्ंकरण इकाइयों के लिये पात्र परियोजना लागत (सयंत्र और मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य) पर 35 प्रतिशत क्रेेडिट लिंक सब्सिडी।
4. रीफर वाहनों और मोबाईल प्री-कूलिंग वैन खरीद के लिये ब्याज सब्सिडी 50 लाख रू0
5. सौर ऊजा परियोजना पर सब्सिडी स्थापना की लागत का 50 प्रतिशत  तथा महिला स्वामित्व वाले संचालित खाद्य प्रसस्करण सयंत्रों के लिये 90 प्रतिशत होगा अनुदान।
6. कॉमन इक्यूवेशन सेंटर की दी विस्तृत जानकारी।

आज चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षत में श्री लोकेश कुमार प्रधानाचार्य, खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केन्द्र, पालीवाल पार्क, आगरा एवं फूड प्रोसेसिंग डवलपमेंट उ0प्र0 के साथ बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का संचालन खाद्य प्रसंस्करण प्रकोष्ठ के चेयरमैन विकास चतुर्वेदी द्वारा किया गया जिसमें चैम्बर ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज एसोसियेशन के अध्यक्ष राजकुमार भगत द्वारा दिनांक 14, 15 एवं 16 जून 2026 को आयोजित होनेे वाले फूड एक्सपो एंड कॉनक्लेव 2026 के बारे में चैम्बर के सदस्यों को विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। उन्होने कहा कि चैम्बर एक बहुत बड़ी संस्था है जिसमें प्रत्येक वर्ग व्यवसाय टेªड सदस्य के रूप में पंजीकृत है। उन्होंने चैम्बर के सभी सदस्यों को इस फूड एक्सपो एंड कॉनक्लेव 2026 में आमंत्रित करते हुए कहा कि इसमें 14, 15 व 16 जून 2026 तक आयोजित सत्र में खाद्य प्रसंस्करण की विभिन्न जानकारियों एवं पैकिंग व अन्य विषयों पर महत्वपूर्ण सत्र भी आयोजित किये जायेंगे।

चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने कहा कि चैम्बर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये पूर्णतः तत्पर है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में टेªनिंग सेंटर, टेस्टिंग सेंटर व सरकार द्वारा इस उद्योगों को क्या-क्या प्रोत्साहन मिलना चाहिये के बारे में ज्ञानवर्धन किया जाना चाहिये। क्योंकि आगरा में टीटीजेड के कारण उद्योगों पर बहुत बंदिशें हैं। चूँकि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग गैर प्रदूषणकारी उद्योगों के अंतर्गत आता है क्योंकि इसमें ईधन के रूप में एलपीजी/पीएनजी गेस का उपयोग किया जाता है। यह एक इको फ्रेेडली उद्योग है। इसलिये चैम्बर सरकार से मांग करता है कि इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिये विशेष पैकेज दिया जाना चाहिये जिससे अधिक से अधिक खाद्य प्रस्संकरण की उद्योगों की स्थापना हो सके।

खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केन्द्र, आगरा के प्रधानाचार्य श्री लोकेश कुमार जी द्वारा खाद्य प्रसंस्करण योजना में उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के बारे में बताया गया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसस्ंकरण इकाइयों के लिये पात्र परियोजना लागत (सयंत्र और मशीनरी और तकनीकी सिविल कार्य) पर 35 प्रतिशत क्रेेडिट लिंक सब्सिडी अधिकतम 10 लाख है। रीफर वाहनों और मोबाईल प्री-कूलिंग वैन खरीद के लिये ब्याज सब्सिडी 50 लाख रू0 की अधिकतम सीमा के अधीन 5 साल की अवधि के लिये प्रतिपूर्ति की जाती है। प्रसस्ंकरण इकाइयों को बिजली आपूर्ति के लिये सौर ऊजा परियोजना पर सब्सिडी स्थापना की लागत का 50 प्रतिशत होगा तथा महिला स्वामित्व वाले संचालित खाद्य प्रसस्करण सयंत्रों के लिये 90 प्रतिशत अनुदान होगा। बैठक में कॉमन इक्यूवेशन सेंटर की जानकारी प्रदान की गयी। परियोजना के 35 प्रतिशत की दर से कोल्ड चेन और 50 प्रतिशत की दर से मूल्यसंवर्धन अवसंरचना के लिये अधिकतम रू0 10 करोड का अनुदान है।।  

बैठक में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, खाद्य प्रसंस्रकण प्रकोष्ठ के चेयरमैन विकास चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, कोषाध्यक्ष विनय मित्तल, राजकुमार भगत, सिद्धार्थ अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील कुमार अग्रवाल, अशोक लालवानी, अंशु जैन, चन्द्र मोहन खंडेलवाल, शुभम मित्तल, मनोज अग्रवाल, गौरव अरोरा उपस्थित थे।

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